2026 में 3 डीआरएस जांच, नतीजा
क्रिकेट में डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी दोबारा जांच है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियमों के तहत भारत, पाकिस्तान, इंग्लैंड और श्रीलंका जैसे देशों की टीमें स...
2026 में 3 डीआरएस जांच, नतीजा
क्रिकेट में डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी दोबारा जांच है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियमों के तहत भारत, पाकिस्तान, इंग्लैंड और श्रीलंका जैसे देशों की टीमें सीमित रिव्यू लेकर तीसरे अंपायर से निर्णय की पुष्टि कराती हैं। बल्लेबाज या कप्तान को सामान्यतः 15 सेकंड के भीतर दोनों हाथों से “टी” का संकेत देना होता है। तीसरा अंपायर अल्ट्राएज से बल्ले का किनारा, हॉक-आई गेंद-पथ से एल्बीडब्ल्यू और कभी-कभी हॉटस्पॉट से संपर्क की जांच करता है। टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में प्रत्येक पारी के रिव्यू की संख्या प्रतियोगिता के नियमों पर निर्भर करती है; कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में यह संख्या दो होती है। सफल रिव्यू या “अंपायर्स कॉल” पर अवसर अक्सर बचा रहता है, जबकि स्पष्ट रूप से गलत रिव्यू समाप्त हो जाता है। निर्णय लेने से पहले गेंद की ऊंचाई, प्रभाव-स्थान और स्टंप पर संभावित टकराव तीनों जांचें।

मैच का फैसला समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि डीआरएस कोई “जादुई सही उत्तर मशीन” नहीं है। यह उपलब्ध वीडियो, ध्वनि, गेंद-पथ और नियमों को जोड़कर निर्णय की विश्वसनीयता बढ़ाता है। क्रिकेट प्रेमी पर मैच समीक्षा पढ़ते समय सबसे पहले यह देखें कि रिव्यू किस आधार पर लिया गया था, क्योंकि केवल बड़ी अपील या दर्शकों का शोर सही संकेत नहीं होता।
जानकारी को एक जगह सुरक्षित रखने के लिए हमारी विस्तृत क्रिकेट मार्गदर्शिका भी देखें।
अगर मैदानी फैसला चुनौती देना हो, तो क्या करें?
जब मैदानी अंपायर का निर्णय संदिग्ध लगे, तो बल्लेबाज या फील्डिंग कप्तान को निर्धारित समय में “टी” संकेत देकर समीक्षा मांगनी चाहिए। रिव्यू की मांग केवल कप्तान या आउट दिए गए बल्लेबाज की सहमति से होती है; ड्रेसिंग रूम से सीधे निर्देश देना नियमसम्मत नहीं माना जाता। संकेत देर से देने पर तीसरा अंपायर समीक्षा स्वीकार नहीं कर सकता, इसलिए भावनात्मक बहस के बजाय तुरंत निर्णय लेना आवश्यक है।
रिव्यू प्रक्रिया सामान्यतः इस क्रम में चलती है:
- मैदानी अंपायर मूल निर्णय सुनाता है।
- कप्तान या बल्लेबाज 15 सेकंड के भीतर समीक्षा का संकेत देता है।
- तीसरा अंपायर पहले जांचता है कि गेंद वैध थी या नहीं।
- जरूरत पड़ने पर अल्ट्राएज, हॉटस्पॉट और हॉक-आई का उपयोग किया जाता है।
- तीसरा अंपायर उपलब्ध प्रमाण के आधार पर मूल निर्णय बरकरार रखता, बदलता या “अंपायर्स कॉल” घोषित करता है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के खेल नियमों में समीक्षा का उद्देश्य “स्पष्ट और निर्णायक गलती को सुधारना” है, न कि हर करीबी फैसले को उलटना। यही सीमा कई नए दर्शकों को चौंकाती है। यदि बल्लेबाज को नॉट आउट दिया गया और गेंद स्टंप के किनारे से गुजरती दिखी, तो कप्तान को केवल अपील की तीव्रता देखकर रिव्यू नहीं लेना चाहिए; गेंद की दिशा, बल्लेबाज की स्थिति और उपलब्ध रिव्यू संख्या साथ में देखनी चाहिए।
क्रिकेट के अंपायरिंग नियमों की शुरुआती मार्गदर्शिका
एक उपयोगी व्यावहारिक नियम यह है कि कप्तान पहले विकेटकीपर और सबसे नजदीकी क्षेत्ररक्षक की जानकारी सुने, फिर संकेत दे। विकेटकीपर को गेंद के बल्ले से संपर्क का सबसे अच्छा कोण मिल सकता है, लेकिन उसका अनुमान भी अंतिम प्रमाण नहीं होता। मैंने ऐसे कई मुकाबले देखे हैं जहां जोरदार अपील ने पूरी टीम को बहका दिया, जबकि अल्ट्राएज में कोई स्पाइक नहीं था। इसलिए “आवाज आई” कहना और वास्तविक किनारा साबित होना दो अलग बातें हैं।
अगर एल्बीडब्ल्यू रिव्यू लेना हो, तो तीन चरण कैसे जांचें?
एल्बीडब्ल्यू समीक्षा में पहले गेंद के पिच होने की जगह, फिर पैड से टकराने का स्थान और अंत में स्टंप पर संभावित प्रभाव देखा जाता है। हॉक-आई इन तीनों बिंदुओं को जोड़कर गेंद का अनुमानित रास्ता बनाता है। यदि अंतिम क्षेत्र नियमों की सीमा में आता है, तो मूल अंपायर का फैसला “अंपायर्स कॉल” के कारण बरकरार रह सकता है।
एल्बीडब्ल्यू जांच को तीन शब्दों में याद रखें:
- पिचिंग: गेंद स्टंप के सामने या बाहर कहां गिरी।
- इम्पैक्ट: गेंद पैड से किस स्थान पर टकराई।
- विकेट: गेंद आगे बढ़ती तो स्टंप से टकराती या नहीं।
यहां सबसे अधिक भ्रम “पिचिंग आउटसाइड लेग” और “अंपायर्स कॉल” को लेकर होता है। दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए गेंद लेग स्टंप के बाहर गिरे तो सामान्य नियमों में एल्बीडब्ल्यू नहीं दिया जाता, चाहे वह बाद में स्टंप से टकराती हुई दिखाई दे। दूसरी ओर, ऑफ स्टंप के बाहर पिच हुई गेंद पर शॉट न खेलना और बाकी शर्तें पूरी होना एल्बीडब्ल्यू की संभावना बना सकता है। हॉक-आई का ग्राफ वास्तविक गेंद को फिर से नहीं चलाता; वह कैमरा-आधारित आंकड़ों से संभावित प्रक्षेपवक्र बनाता है। इस तकनीकी अनुमान की सीमाएं समझे बिना स्क्रीन पर दिखती लाल रेखा को अंतिम सत्य मान लेना वही गलती है जिससे दर्शक अनावश्यक रूप से नाराज होते हैं।

एल्बीडब्ल्यू में एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण स्थिति गेंद की ऊंचाई है। यदि गेंद बल्लेबाज के घुटने के नीचे पैड पर लगती है, तब भी स्टंप की ऊंचाई, बल्लेबाज का संतुलन और गेंद का अनुमानित उछाल निर्णायक रहते हैं। मैदान की घास, पिच की कठोरता और गेंद की गति हॉक-आई मॉडल के इनपुट को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रसारण में दिखाई गई भविष्यवाणी को नियमों से अलग करके नहीं पढ़ना चाहिए।
एल्बीडब्ल्यू नियम और उदाहरण
अगर बल्ले का किनारा जांचना हो, तो कौन-सी तकनीक भरोसेमंद है?
बल्ले का किनारा जांचने के लिए तीसरा अंपायर सामान्यतः अल्ट्राएज या स्निकोमीटर की ध्वनि-आधारित रिकॉर्डिंग देखता है। हॉटस्पॉट इन्फ्रारेड चित्रों से संपर्क के स्थान का संकेत दे सकता है, जबकि वीडियो में बल्ले, पैड और गेंद की गति को साथ मिलाकर देखा जाता है। कोई एक तकनीक हर परिस्थिति में निर्णायक नहीं होती; साफ दृश्य और समकालिक ध्वनि सबसे मजबूत प्रमाण बनते हैं।
अल्ट्राएज में गेंद के पास बल्ले से गुजरने के क्षण पर ध्वनि-तरंग दिखाई जाती है। यदि उसी क्षण स्क्रीन पर स्पष्ट उछाल हो और बल्ले की स्थिति भी मेल खाए, तो किनारा होने की संभावना मजबूत होती है। लेकिन जूते, बल्ले का जमीन से लगना, दस्ताने की हलचल या पैड का कंपन भी ध्वनि पैदा कर सकता है। इसी कारण तीसरा अंपायर केवल एक छोटी रेखा देखकर निर्णय नहीं देता।
हॉटस्पॉट का उपयोग कुछ प्रसारण व्यवस्थाओं में उपलब्ध होता है, पर इसकी दृश्यता गेंद के संपर्क, बल्ले की सतह और कैमरा गुणवत्ता पर निर्भर करती है। मोटे बल्ले का किनारा, बल्ले पर मौजूद नमी या सुरक्षात्मक आवरण परिणाम को कम स्पष्ट कर सकता है। क्रिकेट में तकनीक पर भरोसा करना समझदारी है, पर तकनीक की सीमा छिपाना नहीं। क्रिकेट के निर्णय समीक्षा प्रणाली पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की आधिकारिक जानकारी और निर्णय समीक्षा प्रणाली का विश्वकोशीय विवरण इस अंतर को समझने में उपयोगी हैं।
एक महत्वपूर्ण निरीक्षण यह है कि रिव्यू का परिणाम केवल “आउट” या “नॉट आउट” नहीं होता। तीसरा अंपायर पहले नो-बॉल की जांच कर सकता है, फिर बल्ले का संपर्क देख सकता है और उसके बाद कैच की वैधता पर लौट सकता है। यदि गेंद नो-बॉल थी, तो कैच सही पकड़े जाने के बावजूद बल्लेबाज आउट नहीं होगा। यानी समीक्षा का वास्तविक क्रम उस एक दृश्य से अधिक व्यापक है जिसे टेलीविजन दर्शक आमतौर पर देखते हैं।
अगर रिव्यू संख्या बचानी हो, तो कप्तान क्या करे?
रिव्यू बचाने के लिए कप्तान को अपील की आवाज नहीं, बल्कि प्रमाण की गुणवत्ता देखनी चाहिए। टेस्ट और सीमित ओवरों के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में समीक्षा की संख्या अलग हो सकती है, जबकि “अंपायर्स कॉल” या सफल समीक्षा पर अवसर बचने की व्यवस्था प्रतियोगिता के नियमों से जुड़ी होती है। निर्णय लेने से पहले विकेटकीपर की दृष्टि, गेंद की दिशा, बल्लेबाज का शॉट और मूल अंपायर की स्थिति चारों पर विचार करें।
एक व्यावहारिक निर्णय-सूची इस प्रकार है:
- क्या गेंद बल्ले से लगने की स्पष्ट संभावना है?
- क्या एल्बीडब्ल्यू में गेंद पिचिंग और इम्पैक्ट दोनों अनुकूल हैं?
- क्या रिव्यू संकेत देने के लिए 15 सेकंड अभी बाकी हैं?
- क्या टीम के पास अगली महत्वपूर्ण साझेदारी के लिए समीक्षा बची है?
- क्या मैदान पर मौजूद खिलाड़ी ने वास्तव में गेंद देखी थी?
“अंपायर्स कॉल” रिव्यू को हमेशा नष्ट नहीं करती, क्योंकि कई नियम व्यवस्थाओं में वह मूल फैसला बनाए रखते हुए समीक्षा अवसर बचाती है। यही कारण है कि कप्तान के लिए एक करीबी एल्बीडब्ल्यू समीक्षा कभी-कभी कम जोखिम वाली हो सकती है, लेकिन यह सार्वभौमिक नियम नहीं है। प्रतियोगिता, प्रारूप और संबंधित खेल शर्तें पहले देखनी चाहिए। टेस्ट, एकदिवसीय और टी-20 नियमों की तुलना

मैंने मैच देखते समय एक बार लगातार दो अपीलों में यही गलती की: पहली गेंद पर उत्साह में “टी” बन गया, दूसरी पर असली किनारा था और समीक्षा बची ही नहीं। आंकड़ा साफ है—डीआरएस सीमित संसाधन है, भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं। कप्तान यदि हर करीबी अपील पर रिव्यू लेगा, तो अंतिम ओवरों में स्पष्ट गलती सुधारने का अवसर नहीं बचेगा। क्रिकेट प्रेमी की मैच समीक्षा में इस रणनीतिक लागत को अलग से नोट करना चाहिए, क्योंकि स्कोरकार्ड केवल रिव्यू की संख्या दिखाता है, उसके खोए हुए अवसर नहीं।
इस रणनीतिक पहलू पर और उदाहरण देखना चाहते हैं? मैच-वार समीक्षा पढ़ना उपयोगी रहेगा।
आम गलतियां कौन-सी हैं और उनसे कैसे बचें?
डीआरएस में सबसे आम गलती तकनीकी चित्र को नियम से अलग समझना है। दर्शक लाल गेंद-पथ देखकर मान लेते हैं कि बल्लेबाज निश्चित रूप से आउट है, जबकि पिचिंग, इम्पैक्ट, स्टंप और अंपायर्स कॉल की शर्तें साथ लागू होती हैं। दूसरी बड़ी भूल यह है कि अल्ट्राएज की हर आवाज को बल्ले का किनारा मान लिया जाता है, जबकि पृष्ठभूमि का शोर और दूसरे संपर्क भी रिकॉर्ड हो सकते हैं।
इन गलतियों से बचने के लिए यह सूची याद रखें:
- मूल अंपायर का फैसला पहले समझें।
- नो-बॉल की जांच को नजरअंदाज न करें।
- एल्बीडब्ल्यू में तीनों चरण अलग-अलग देखें।
- कैच में गेंद का जमीन से संपर्क जांचें।
- रिव्यू संख्या और शेष समय पर नजर रखें।
- “अंपायर्स कॉल” को असफल समीक्षा समझने से पहले नियम पढ़ें।
मैच प्रसारण में कैमरा कोण बदलने पर गेंद का उछाल अलग दिखाई दे सकता है। सामने से दिखता किनारा पीछे के कोण से गायब हो सकता है, और धीमी गति कभी-कभी संपर्क को वास्तविक समय से अधिक बड़ा दिखाती है। इसीलिए तीसरा अंपायर कई कोणों को एक साथ मिलाता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के खेलने की शर्तों में तकनीकी समीक्षा के साथ मैदानी निर्णय की भूमिका भी महत्वपूर्ण रखी गई है।
आधिकारिक दस्तावेजों का मूल सिद्धांत संक्षेप में यही है: “रिव्यू प्रणाली का उद्देश्य स्पष्ट गलती सुधारना है।” इसे “हर विवाद का पूर्ण समाधान” समझना गलत है। तकनीक निष्पक्षता बढ़ाती है, लेकिन कैमरा-अंधे क्षेत्र, ध्वनि की अस्पष्टता और अनुमानित गेंद-पथ जैसी सीमाएं पूरी तरह समाप्त नहीं करती। सच कहूं तो यहां दर्शक अक्सर अंपायर से ज्यादा निश्चित होते हैं—और यही आत्मविश्वास सबसे पहले जांचे जाने लायक है।
30 दिनों में डीआरएस समझने की जांच कैसे करें?
तीस दिनों में डीआरएस समझने का सबसे अच्छा तरीका रोजाना मैच देखकर केवल परिणाम नहीं, बल्कि समीक्षा का कारण लिखना है। हर रिव्यू के लिए प्रारूप, टीम, गेंद संख्या, मूल फैसला, इस्तेमाल तकनीक और अंतिम निर्णय दर्ज करें। 30 उदाहरणों के बाद आपको स्पष्ट दिखेगा कि एल्बीडब्ल्यू, कैच, बल्ले का किनारा और नो-बॉल जांच में तीसरे अंपायर का क्रम अलग-अलग हो सकता है।
अपनी अभ्यास-पत्रिका में ये कॉलम बनाएं:
- तारीख और प्रतियोगिता
- टीम और बल्लेबाज
- गेंद संख्या
- मूल अंपायर निर्णय
- कप्तान ने रिव्यू क्यों लिया
- अल्ट्राएज, हॉटस्पॉट या हॉक-आई में क्या दिखा
- अंतिम फैसला
- रिव्यू बचा या समाप्त हुआ
इस अभ्यास का अतिरिक्त लाभ यह है कि आप प्रसारण की भाषा समझने लगेंगे। “कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं”, “निर्णय बरकरार” और “अंपायर्स कॉल” अलग परिणाम हैं, भले ही तीनों स्क्रीन पर कुछ सेकंड के लिए एक जैसे लगें। 2026 में डीआरएस तकनीक अधिक तेज और दृश्य रूप से प्रभावशाली हो सकती है, लेकिन नियमों की समझ अब भी सबसे उपयोगी उपकरण है। क्रिकेट प्रेमी पर प्रकाशित मैच समीक्षा को इस तालिका से मिलाकर पढ़ेंगे तो भावनात्मक बहस की जगह प्रमाण-आधारित निष्कर्ष निकाल पाएंगे।

अब आपका अगला कदम सरल है: अगला मैच देखते समय केवल “आउट” या “नॉट आउट” न लिखें, बल्कि यह भी दर्ज करें कि निर्णय किस तकनीक और किस नियम से बदला। यही आदत आपको दर्शक से समझदार विश्लेषक बनाएगी। अंतिम निष्कर्ष यह है कि क्रिकेट में डीआरएस कैसे काम करता है—इसका उत्तर तकनीक, समय-सीमा, सीमित रिव्यू और अंपायर्स कॉल के संयुक्त ढांचे में छिपा है।
अपनी अगली मैच समीक्षा को अधिक सटीक बनाने के लिए यह मार्गदर्शिका साथ रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्रिकेट में डीआरएस क्या है?
उत्तर: डीआरएस मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी समीक्षा करने वाली प्रणाली है। इसमें बल्लेबाज या फील्डिंग कप्तान निर्धारित समय में “टी” संकेत देकर तीसरे अंपायर से निर्णय की जांच मांगता है। हॉक-आई, अल्ट्राएज, स्निकोमीटर और उपलब्ध होने पर हॉटस्पॉट जैसे साधनों से गेंद, बल्ले, पैड और स्टंप की स्थिति देखी जाती है। इसका उद्देश्य हर विवाद मिटाना नहीं, बल्कि स्पष्ट अंपायरिंग गलती सुधारना है।
प्रश्न: डीआरएस लेने के लिए कितने सेकंड मिलते हैं?
उत्तर: सामान्य अंतरराष्ट्रीय नियमों में रिव्यू मांगने के लिए लगभग 15 सेकंड मिलते हैं। समय मूल निर्णय सुनाए जाने के बाद शुरू होता है और कप्तान या आउट दिए गए बल्लेबाज को उसी अवधि में दोनों हाथों से “टी” संकेत देना होता है। देर से दिया गया संकेत तीसरे अंपायर अस्वीकार कर सकता है। प्रतियोगिता की विशेष खेल शर्तों में समय या प्रक्रिया में बदलाव संभव है, इसलिए आधिकारिक नियम देखना सुरक्षित है।
प्रश्न: एल्बीडब्ल्यू में डीआरएस कैसे फैसला करता है?
उत्तर: एल्बीडब्ल्यू रिव्यू में गेंद की पिचिंग, पैड से इम्पैक्ट और स्टंप पर संभावित टकराव तीन मुख्य चरण होते हैं। हॉक-आई गेंद के कैमरा-आधारित रास्ते से अनुमान लगाता है कि वह स्टंप से टकराती या नहीं। यदि परिणाम सीमा के बहुत करीब हो, तो “अंपायर्स कॉल” के कारण मूल फैसला कायम रह सकता है। गेंद लेग स्टंप के बाहर पिच होने पर सामान्यतः एल्बीडब्ल्यू नहीं दिया जाता।
प्रश्न: अल्ट्राएज और हॉटस्पॉट में क्या अंतर है?
उत्तर: अल्ट्राएज ध्वनि-तरंग के जरिए गेंद और बल्ले के संपर्क का संकेत देता है, जबकि हॉटस्पॉट इन्फ्रारेड चित्रों से संपर्क-स्थान दिखाने का प्रयास करता है। अल्ट्राएज में बल्ले के पास गेंद गुजरने के समय दिखने वाली ध्वनि-लहर महत्वपूर्ण होती है। हॉटस्पॉट की स्पष्टता बल्ले की सतह, नमी, संपर्क की तीव्रता और कैमरा गुणवत्ता पर निर्भर करती है। इसलिए तीसरा अंपायर तकनीक को वीडियो और खिलाड़ी की स्थिति के साथ मिलाकर देखता है।
प्रश्न: रिव्यू असफल होने पर क्या टीम का अवसर समाप्त हो जाता है?
उत्तर: स्पष्ट रूप से गलत समीक्षा होने पर सामान्यतः टीम का एक रिव्यू समाप्त हो जाता है। सफल समीक्षा में अवसर बच सकता है, और कई नियम व्यवस्थाओं में “अंपायर्स कॉल” होने पर भी रिव्यू बरकरार रहता है। हालांकि टेस्ट, एकदिवसीय और टी-20 प्रतियोगिताओं में रिव्यू संख्या अलग हो सकती है। कप्तान को मैच शुरू होने से पहले संबंधित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद या प्रतियोगिता की खेल शर्तें जांचनी चाहिए।
प्रश्न: डीआरएस और मैदानी अंपायर के फैसले में क्या अंतर है?
उत्तर: मैदानी अंपायर तत्काल दृश्य और मैदान की स्थिति के आधार पर मूल निर्णय देता है, जबकि डीआरएस उस निर्णय की उपलब्ध तकनीकी प्रमाणों से समीक्षा कराता है। तीसरा अंपायर तभी फैसला बदलता है जब प्रमाण नियम के अनुसार पर्याप्त और स्पष्ट हो। करीबी स्थिति में मूल निर्णय कायम रह सकता है, खासकर एल्बीडब्ल्यू की अंपायर्स कॉल में। इसलिए डीआरएस अंपायर को पूरी तरह हटाता नहीं, बल्कि उसके निर्णय की जांच का अतिरिक्त स्तर प्रदान करता है।
प्रश्न: डीआरएस में सबसे बड़ी गलती से कैसे बचें?
उत्तर: सबसे बड़ी गलती अपील के उत्साह में बिना प्रमाण रिव्यू लेना है। कप्तान को पहले देखना चाहिए कि गेंद बल्ले से लगी, एल्बीडब्ल्यू में पिचिंग और इम्पैक्ट अनुकूल हैं, नो-बॉल तो नहीं और टीम के पास कितने रिव्यू बचे हैं। विकेटकीपर तथा नजदीकी क्षेत्ररक्षकों की जानकारी उपयोगी है, लेकिन अंतिम प्रमाण नहीं। 15 सेकंड की सीमा में शांत, नियम-आधारित फैसला आमतौर पर भावनात्मक संकेत से बेहतर होता है।